
महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को एक ऐसी तस्वीर वायरल हुई, जिसने दिल्ली से मुंबई तक सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। पिछले दो साल से चर्चा में रही पवार परिवार की “महा-जंग” के बाद पहली बार— अजीत पवार-सुप्रिया सुले एक ही मंच पर, मुस्कुराते हुए, हाथ मिलाते नजर आए।
जुलाई 2023 में शरद पवार से अलग राह पकड़ने के बाद यह पहला मौका है, जब ‘दादा’ और ‘ताई’ किसी आधिकारिक कार्यक्रम में साथ दिखे।
अब सवाल यही है— यह सिर्फ चुनावी मजबूरी है या सत्ता की बड़ी पटकथा?
पुणे की खातिर दुश्मनी Pause पर!
मौका था पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनावों के लिए साझा घोषणापत्र जारी करने का। गौरतलब है कि महाराष्ट्र की 29 स्थानीय निकायों में 15 जनवरी 2026 को मतदान होना है।
राजनीतिक विरोधाभास साफ है
- अजीत पवार की NCP → सत्ताधारी महायुति (BJP-शिंदे)
- सुप्रिया सुले → विपक्षी महाविकास अघाड़ी
लेकिन पुणे के स्थानीय समीकरणों ने दोनों कट्टर सियासी प्रतिद्वंद्वियों को एक मेज पर बैठा दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों गुटों के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे और कार्यकर्ताओं में साफ तौर पर उत्साह और जोश दिखा। विपक्ष और सहयोगी दल—दोनों की धड़कनें तेज हो गईं।
“महाराष्ट्र की राजनीति में खून के रिश्ते कभी-कभी वोट बैंक से भी गहरे होते हैं।”
Ajit Pawar Statement: इशारों में बड़ा संदेश
मुलाकात के बाद जब मीडिया ने भविष्य के रिश्तों पर सवाल किया, तो अजीत पवार ने बेहद सधे अंदाज में सियासी बम फोड़ दिया— “राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता।”

उन्होंने माना कि कार्यकर्ता इस नए गठबंधन से खुश हैं और नगर निकाय चुनावों के बाद स्थायी एकता पर भी विचार हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि सीट बंटवारे की व्यस्तता के चलते अभी विस्तार से चर्चा नहीं हुई है— लेकिन ‘घर वापसी’ की संभावनाओं से इनकार भी नहीं किया।
Pune Manifesto: वादों की पूरी झड़ी
साझा घोषणापत्र में पुणे और पिंपरी-चिंचवड की जनता के लिए लोकप्रिय लेकिन भारी वादे किए गए हैं— शहर की सड़कों को गड्ढा-मुक्त बनाना। 500 वर्ग फुट तक के घरों पर No Property Tax, छात्रों को मुफ्त कंप्यूटर टैबलेट, हाई-टेक अस्पताल और हर घर नल से जल, पुणे मेट्रो और PMPML बसों में मुफ्त यात्रा।
ये वादे सुनकर जनता खुश, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक कैलकुलेटर निकाल चुके हैं।
बड़ा सवाल: रणनीति या Re-Union?
अब महाराष्ट्र की राजनीति एक ही सवाल पूछ रही है— क्या यह सिर्फ Local Body Elections तक की दोस्ती है? या फिर NCP के दो फाड़ दोबारा जुड़ने जा रहे हैं?
पवार परिवार की यह तस्वीर बता रही है कि 2026 से पहले महाराष्ट्र में बहुत कुछ बदल सकता है।
यह खबर Emotion + Power + Politics का परफेक्ट मिश्रण है। एक तस्वीर, एक मंच और ढेर सारे संकेत— महाराष्ट्र की सियासत अब नई दिशा की ओर बढ़ती दिख रही है।
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